Saturday, January 27, 2024

१८१. कोटि कोटि हिंदू मिलकर, श्रीराम-नाम गुंजाते हैं

 १८१. कोटि कोटि हिंदू मिलकर, श्रीराम-नाम गुंजाते हैं


कोटि कोटि हिंदू मिलकर, श्रीराम-नाम गुंजाते हैं

सौगंध कभी जो खायी थी, वह पूर्ण किए हम जाते है 

हम मंदिर वही बनाते हैं || धृ ० ||


हर अंतर में श्रीराम-सिया, है लखन-भरत आचारों में

बल भक्ती का है संग लिए, हनुमान बसे घर-द्वारों में

श्रीरामकथा का घोष सदा, गूँजे आँगन-गलियारों में 

यह पुण्यधरोहर अमृत सी, छलके हर घर-परिवारों में  

हर गाँव अयोध्या सा बनकर, जन जन में राम समाते हैं ||१ ||


आक्रांता ने जो भ्रष्ट किया, वह क्षेत्र होत अब पावन है  

सदियों से जो बलिदान हुए, सब होत चले चिरसार्थक है 

फिर हिंदुशक्ति है जाग उठी, दानव बैठे अब डरकर है 

आए तैमुर-बाबर कोई, हम सिद्ध कमान उठाकर है

मंदिर राघव का रचकर हम, आदर्श वही दोहराते हैं ||२ ||

Sunday, December 17, 2023

१८० श्रीरघुवर जी के अवधपुरी में, प्राण प्रतिष्ठा होना है

 १८०  श्रीरघुवर जी के अवधपुरी में, प्राण प्रतिष्ठा होना है


श्रीरघुवर जी के अवधपुरी में, प्राण प्रतिष्ठा होना है

निमंत्रण को स्वीकार करो-अब सबको अयोध्या चलना है

जय बजरंगी जय हनुमान, वन्दे मातरम् जय श्री राम 

श्री राम जय राम जय जय राम, वन्दे मातरम् जय श्री राम ॥धृ०॥ 

इस मंदिर को पाने हेतु, बार बार संघर्ष हुआ।

रामभक्तों के बलिदानों से, मंदिर बनकर खड़ा हुआ।

अब मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा-2, धूम-धाम से होना है।

निमंत्रण को स्वीकार करो.. || १ || 

पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी को, प्राण प्रतिष्ठा होना है

 मंदिर में कीर्तन भजन हो, घर-घर दिया जलाना है 

मंदिर भव्य बनाकर हमने-2, अपना वचन निभाया है

निमंत्रण को स्वीकार करो. . || २ || 

गाँव-गाँव के मंदिर मठ में, सबको एकत्रित करना है

श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा, जन जन को दिखलाना  है,

श्री राम की प्रथम आरती-2, मिलकर सबको गाना है।

निमंत्रण को स्वीकार करो. . || ३ || 


१७९ महामंत्र हा नवविजयाचा, नव्या युगाचा नव पर्वाचा

 १७९  महामंत्र हा नवविजयाचा, नव्या युगाचा नव पर्वाचा


महामंत्र हा नवविजयाचा, नव्या युगाचा नव पर्वाचा

दाही दिशातुनी घुमते नाम, रामप्रभूचे सुंदर नाम ।

जय श्रीराम जय श्रीराम ॥धृ०॥

नवे पर्व हे हिंदुत्वाचे, संघशक्तिचे शिवशक्तीचे 

हिंदुमनांचा स्वामी राम, गंगेसम हे पवित्र नाम ।

जय श्रीराम जय श्रीराम ॥१॥

धर्म राखुया इथे निरंतर, खलप्रवृत्ती नुरो धरेवर

पुरुषार्थाचे मंगलधाम, रामप्रभूचे सुंदर नाम ।

जय श्रीराम जय श्रीराम ॥२॥

जीर्ण जातसे जेव्हा जळुनी, नवे येतसे सहज उजळुनी

छत्रपतींच्या स्वप्नांतले, हिंदूंचे हे सुवर्णयुग ये,

मुखी घेऊनी पवित्र नाम, जय श्रीराम जय श्रीराम ॥३॥

मंदिर बांधले जन्मभूमीवर, पराक्रमाने विशाल सुंदर

नवविजयाचा मार्ग दाखविल, जनशक्तीचा मंत्र महान ।

जय श्रीराम जय श्रीराम ॥४॥

लोकशाहीचा आद्य प्रणेता, सुजनशक्तिचा भाग्यविधाता

हिंदू युगाचा नायक राम, हिंदूंचा हा पंचप्राण ।

जय श्रीराम जय श्रीराम ॥५॥

१७८ सद्विचार की नीव हमारी, शिव संकल्पित आज बनें

१७८  सद्विचार की नीव हमारी, शिव संकल्पित आज बनें 


सद्विचार की नींव हमारी, शिव संकल्पित आज बनें 

ईश्वरीय है कार्य हमारा, निमित्त बन हम कार्य करें ||धृ०||

हमे पता है मार्ग हमारा, कंटकमय और दुर्गम है 

विश्वास सदा रहा है मन में, यही हमारा संबल है 

चलते चलते लक्ष्य प्राप्ति हित, मार्गक्रमण हम करते हैं ||१|| 

सत्ता पद की चकाचौंध में, मार्ग कहीं हम ना छोडे 

साधन को ही साध्य मानकर, ना भूलें और ना भटकें 

ना हम थकते, ना हम रुकते, मार्गक्रमण हम करते हैं ||२||

धन्य हुआ है जीवन अपना, मातृभूमि की सेवा में, 

भारत हि है ईश्वर अपना, पूजा के हम दीप बने 

राष्ट्रयज्ञ के साधक बनकर, मार्गक्रमण हम करते हैं ||३|| 

Saturday, July 8, 2023

१७७ भगवा लहर लहर लहराए

१७७. भगवा लहर लहर लहराए

भगवा लहर लहर लहराए,
त्याग शौर्य संदेश सुनाये ||धृ०||

पूर्व दिशासे किरणे फैले
जग को ज्योतिर्मय कर डाले
भगवत ध्वज की दिव्य प्रभा को
हम सब प्रतिदिन शीष नमाए ||१||

अरुणिम स्वर्णिम रंग जमाये
धर्मं भावना सतत जगाये
त्याग तपस्या बंधु भावना
हम सब जीवन में अपनाए ||२||

विश्वगुरु यह भगवत् ध्वज है
विश्व में जय का यह प्रतीक है
वैभव के अति उच्च शिखरपर
भारत को फिरसे पहुंचाये ||३||

Sunday, June 11, 2023

१७६. हिंदूभूमिच्या परमवैभवा प्रगटविण्या साकार

 १७६. हिंदूभूमिच्या परमवैभवा प्रगटविण्या साकार  


हिंदूभूमिच्या परमवैभवा प्रगटविण्या साकार  

समर्थ होऊन राष्ट्र भरू दे स्वत्वाची हुंकार ||धृ०||

पोषण होवो तनामनांचे अशी हवी समृद्धी

अन लाभो सकलास त्यासवे निरामयाची सिद्धी 

संस्कारातून राष्ट्र भावना उपजावी अनिवार ||१|| 

स्वयंपूर्ण हो समाज हा अन स्वावलंबि हो व्यक्ती

समाजभक्ती रुजो मनांतुन अशी घडो अभिव्यक्ती

व्यष्टी समष्टी एकत्वाचा घडो नित्य संस्कार ||२|| 

जोडुन ठेवी चराचरा जो धर्म सनातन इथला 

आज आपुल्या आचारातुन जगता दाउ चला 

दिव्य अशा युगधर्माचा हो पुनश्च साक्षात्कार ||३||

हिंदू हिंदू एकात्म करावा स्नेह अर्पुनी शुद्ध 

समर्थ भारत आज घडविण्या संघ शक्ती हि सिद्ध 

सामर्थ्यास्तव संघटनेचा घडु दे अविष्कार ||४||

Tuesday, August 16, 2022

१७५ . गुरु वंद्य महान

 १७५ . गुरु वंद्य महान

गुरु वंद्य महान भगवा एकचि जीवन प्राण
अर्पण कोटी कोटी प्रणाम ॥ध्रु०॥


शोणित वर्णामधुनी शिकलो सारे उज्ज्वल त्याग
व्यापित आलो दिव्य दृष्टिने अखंड भारतभाग
बघुनी फडफड देशभक्तिची भडके अंतरि आग
कटिबद्ध उभे तव छत्राखाली भारतभूसंतान ॥१॥


शौर्याने तव जगी गाजला स्फूर्तिप्रद इतिहास
पाहिलेस निज नेत्रांनी किति भीषण रणसंग्राम
देहदंड कुणि हाल भोगिले केले निज बलिदान
बलिदान नव्हे ते पूजन केले राखाया सन्मान ॥२॥


ऋषी तपस्वी महामुनींचा संतांचा अभिमान
अनादिकालापासुनीच तुज अग्रपुजेचा मान
बघशिल भावी भाग्यपूर्ण अन्‌ उज्ज्वल वैभवकाळ
हो यशस्वी असे सुमंगल दे शुभ वरदान ॥३॥


शुद्धशीलता चारित्र्याची पावित्र्याची खाण
अभय वीरता शौर्य धीरता संयम शांतिनिधान
सद्भावे तुज आम्ही मानिले पूज्य गुरु भगवान
परमपावना तव पदि वाही देशास्तव हे प्राण ॥४॥